Tuesday, May 20, 2014

मरने की आर्ज़ू मैं जिये जा रहा हूँ में, 
पाने  की आरज़ू में खोये जा रहा हूँ में !

जिंदिगी-ए -कू -ए - यार  मरने की आअस में ,
मर्ग ने भी खुकरा दिया जीने की अआस में !

रह रह के वोह मक़ाम याद आ रहे मुझे, 
उस दिल रुबा ने वसल में बख्शे थे  जो मुझे !

उस वक़्त जब में में नहीं रहा ,
वोह हाल जो बयां के काबिल नहीं रहा !

दिल से उठे अरमान जो उस आर्श पे गये, 
उठने की जुस्तजू में हम दस्ते चले गये , हम दस्ते चले गये!

वोह नूर जो उस रात मैंने छु के पा लिया ,
एह्सास जिसका मेरी रूह पे छा गया !
एह्सास जिसका मेरी रूह पे छा गया !


 Offering in the lotus feet of My Krishna!

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