Monday, December 29, 2014

आज़ तेरी बज़म


आज़ तेरी बज़म मे ऐ यार धम बर लूं ज़रा 
 आज तेरी आग़ोश मे ऐ यार सर रख लून ज़रा


आब्शारे की तरह प्यार यह पा लून सदा 
 

 
महताब तू मेरा आफ़ताब की तरहरोशन मेरे रात दिन कर के धाम बर ले ज़रा  
फिर उठे अरमान यह मेरे तू सांसूं मे बर ले ज़रा
काश तेरा हर पहर साथ हो मेरे सदा 
काश तेरी रूह जो यह पासबाने यार होकाश मे रोता रहूँ प्यार मे तेरे सदा 
कि दर्द मेरे सीने मे जो यह पाक दामन की तरह
अश्क़ जो बहते तेरे मेरे लख्ते जिगर की तरह
याद रख यह ज़िन्दिगी तेरी नहीं मेरी है यह
सांस जो लेता है तू है मेरी सांसूं की सादा 

 उट्ठे हुए जो हाथ यह बारगाहे ए पीर मे

मांगते हे तुझे ही यह उसकी चोखट से सदा